काल कोठरी में बैठे-बैठे इमरान ने किया खेल, इस्लामाबाद थर्राया, सरकार पर हमलावर विपक्षी- PTI से बात क्यों नहीं करते?
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में इस वक्त इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने अपनी ताकत कुछ इस तरह दिखाई है कि शहबाज शरीफ की सरकार टेंशन में आ गई है. विपक्ष काफी हद तक पीटीआई का समर्थन कर रहा है और हालात ये बन चुके हैं कि घबराए शहबाज शरीफ अब केपीके के आंदोलन को छोड़कर बात करने लगे हैं इस इलाके आतंकवाद की

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर सड़क से संसद तक गर्माई हुई है. विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के लॉन्ग मार्च और विरोध प्रदर्शनों ने सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है. धीरे-धीरे विपक्ष शहबाज शरीफ के खिलाफ इस मुद्दे पर लामबंद होने लगा है और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने खुलकर कहा है कि सरकार किसी को प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकती. उन्होंने पीटीआई के प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार को कहा है कि उन्हें संवाद और राजनीतिक सहमति पर जोर देना चाहिए.
इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान में मौजूदा टकराव अब सिर्फ सरकार और विपक्ष के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है. इसका असर पूरे राजनीतिक ढांचे और शासन व्यवस्था पर पड़ रहा है. फजलुर रहमान ने सरकार और विपक्ष से बातचीत की अपील करते हुए कहा है कि राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े संकटों का समाधान ताकत या सैन्य तरीके से नहीं निकाला जा सकता. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब PTI लगातार सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
PTI के लॉन्ग मार्च ने मचाई खलबली
इमरान खान की पार्टी का लॉन्ग मार्च केवल सड़कों पर भीड़ जुटाने का अभियान नहीं है, बल्कि इसके जरिए विपक्ष सरकार को राजनीतिक रूप से घेरने और अपनी मांगों को मजबूत तरीके से रखने की कोशिश है. पाकिस्तान में लॉन्ग मार्च की राजनीति नई नहीं है. देश के राजनीतिक इतिहास में सड़कों पर उतरकर सरकारों पर दबाव बनाने की रणनीति कई बार इस्तेमाल की गई है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसका प्रभाव ज्यादा व्यापक दिखाई दे रहा है.
